Hamarya hal per roya december  guzal





 

ہمارے حال پر رویا دسمبر

وہ دیکھو ٹوٹ کر برسا دسمبر


گزر جاتا ہے سارا سال یوں تو

نہیں کٹتا مگر تنہا دسمبر


بھلا بارش سے کیا سیراب ہوگا

تمھارے وصل کا پیاسا دسمبر


وہ کب بچھڑا، نہیں اب یاد لیکن

بس اتنا علم ہے کہ تھا دسمبر


یوں پلکیں بھیگتی رہتی ہیں جیسے

میری آنکھوں میں آ ٹھہرا دسمبر


अपने हालात पर रोना दिसंबर

उस टूटे हुए दिसंबर को देखिए


पूरा साल ऐसे ही बीत जाता है

कटता नहीं पर तनहा दिसम्बर


अच्छा, वर्षा से क्या सिंचित होगा?

तेरे रिश्तेदार का प्यासा दिसंबर


मुझे याद नहीं है कि वह कब पैदा हुआ था

मुझे केवल इतना पता है कि यह दिसंबर था


पलकें ऐसे ही भीगती रहती हैं

दिसम्बर मेरी आँखों में आ गया